मजहब को यह मौका न मिलना चाहिए कि वह हमारे साहित्यिक, सामाजिक, सभी क्षेत्रों में टाँग अड़ाए। - राहुल सांकृत्यायन।

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हरियाणवी रागनियाँ

रागनी एक कौरवी लोकगीत विधा है जो आज स्वतंत्र लोकगीत विधा के रूप में स्थापित हो चुकी है। हरियाणा में मनोरंजन के लिए गाए जाने वाले गीतों में रागनी प्रमुख है। यहां रागनी एक स्वतंत्र व लोकप्रिय लोकगीत विधा के रूप में प्रसिद्ध है। हरियाणा में रागनी की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं व सामान्य मनोरंजन हेतु रागनियां अहम् हैं। हरियाणा के अतिरिक्त उत्तर प्रदेश में रागनियाँ बहुत लोकप्रिय है। कवि सत्यपाल सिंह की खड़ी बोली में लिखी हुई की एक निम्न रागनी ७० के दशक में सम्पूर्ण उत्तर भारत में छाई रही -

इस फैशन ने म्हारे देश की कतई बिगाड़ी चाल, देखियो के होगा।
धूम घाघरे छोड़ दिए साड़ी और सलवार लई


सांग (लोकनाट्य विधा) का आधार रागनियों ही थी। सांग धीरे-धीर विलुप्त हो गए तत्पश्चात रागनी एक स्वतंत्र एवं लोकप्रिय लोकगीत विधा के रूप में स्थापित हुई।

इस पृष्ठ पर हरियाणा के प्रसिद्ध रचनकारों की रागनियाँ उपलब्ध करवाई गई हैं। यदि आपके पास कुछ सामग्री हो तो अवश्य भेजें।

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