म्हारा हरियाणा : हरियाणवी लोक साहित्य, संस्कृति एवं भाषा
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हरियाणवी रागनियां
रागनी à¤à¤• कौरवी लोकगीत विधा है जो आज सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤° लोकगीत विधा के रूप में सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ हो चà¥à¤•ी है। हरियाणा में मनोरंजन के लिठगाठजाने वाले गीतों में रागनी पà¥à¤°à¤®à¥à¤– है। यहां रागनी à¤à¤• सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤° व लोकपà¥à¤°à¤¿à¤¯ लोकगीत विधा के रूप में पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ है। हरियाणा में रागनी की पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤—िताà¤à¤‚ आयोजित की जाती हैं व सामानà¥à¤¯ मनोरंजन हेतॠरागनियां अहमॠहैं। हरियाणा के अतिरिकà¥à¤¤ उतà¥à¤¤à¤° पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ में रागनियाठबहà¥à¤¤ लोकपà¥à¤°à¤¿à¤¯ है। कवि सतà¥à¤¯à¤ªà¤¾à¤² सिंह की खड़ी बोली में लिखी हà¥à¤ˆ की à¤à¤• निमà¥à¤¨ रागनी à¥à¥¦ के दशक में समà¥à¤ªà¥‚रà¥à¤£ उतà¥à¤¤à¤°-à¤à¤¾à¤°à¤¤ में छाई रही - 'इस फैशन ने मà¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ देश की कतई बिगाड़ी चाल, देखियो के होगा। धूम घाघरे छोड़ दिठसाड़ी और सलवार लई.... सांग (लोकनाटà¥à¤¯ विधा) का आधार रागनियों ही थी। सांग धीरे-धीर विलà¥à¤ªà¥à¤¤ हो गठततà¥à¤ªà¤¶à¥à¤šà¤¾à¤¤ रागनी à¤à¤• सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤° à¤à¤µà¤‚ लोकपà¥à¤°à¤¿à¤¯ लोकगीत विधा के रूप में सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ हà¥à¤ˆà¥¤ इस पृषà¥à¤ पर हरियाणा के पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ रचनकारों की रागनियाठउपलबà¥à¤§ करबाई गई हैं। यदि आपके पास कà¥à¤› सामगà¥à¤°à¥€ हो तो अवशà¥à¤¯ à¤à¥‡à¤œà¥‡à¤‚।
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ताऊ बोल्या
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